
जंग सिर्फ मैदान में नहीं लड़ी जाती… असली लड़ाई सत्ता के अंदर चलती है। और ईरान में अभी वही हो रहा है।
एक चेहरा गिरता है… दूसरा अचानक उभर आता है। ईरान की सत्ता में जो बदलाव दिख रहा है, वो सिर्फ नेतृत्व का नहीं… पूरी रणनीति का संकेत है।
नेतृत्व संकट: कौन चला रहा है ईरान?
यहां तस्वीर साफ नहीं… बल्कि धुंधली है। अली खामेनेई के बाद सत्ता कई हाथों में बंटी हुई नजर आई। फिर मोजतबा खामेनेई सामने आए, लेकिन जंग के दौरान उनके घायल होने की खबरों ने लीडरशिप को और अनिश्चित बना दिया।
नया उभार: अहमद वाहिदी का नाम क्यों चर्चा में?
अब एक नया चेहरा तेजी से उभरा है अहमद वाहिदी (जिन्हें वाहिद शाहचेराघी भी कहा जाता है) बताया जा रहा है कि वो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के प्रमुख के तौर पर सबसे प्रभावशाली भूमिका में हैं। उनके फैसले सिर्फ सेना नहीं… कूटनीति को भी प्रभावित कर रहे हैं। यहां बंदूक और नीति… दोनों एक ही हाथ में आ रहे हैं।
विदेश नीति में बदलाव: बातचीत से टकराव तक
ईरान की विदेश नीति अब बदलती नजर आ रही है। जहां पहले बातचीत और बैलेंस की कोशिश दिखती थी, अब सख्ती और टकराव का रुख मजबूत हो रहा है। अब्बास अराघची जैसे नरमपंथी नेताओं का प्रभाव घटता बताया जा रहा है। अमेरिका के साथ वार्ता की संभावनाएं
कमजोर होती नजर आ रही हैं। डिप्लोमेसी पीछे हटे… तो संघर्ष आगे बढ़ता है।
IRGC का बढ़ता कब्जा: सेना से सत्ता तक
IRGC सिर्फ सेना नहीं… अब सत्ता का केंद्र बनती दिख रही है। फैसले वही ले रहे हैं, कूटनीति में दखल बढ़ा है और अंदरूनी राजनीति पर पकड़ मजबूत हुई है। जब सैन्य ताकत राजनीति को चलाने लगे… तो दिशा बदल जाती है।
इस्लामाबाद वार्ता: पहला संकेत
हालिया बातचीत में भी बदलाव दिखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल में फेरबदल किया गया, जहां उदारवादी चेहरों को पीछे कर दिया गया। यह संकेत है कि ईरान अब बातचीत से ज्यादा रणनीतिक जवाब पर जोर दे रहा है।
क्या जंग और लंबी होगी?
अब असली चिंता यही है — अगर ईरान का नेतृत्व और ज्यादा सख्त रुख अपनाता है, तो क्या युद्धविराम मुश्किल होगा? क्या अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ेगा? क्या मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ेगी? जब फैसले सख्त हों… तो नतीजे भी भारी होते हैं।
सत्ता का नया चेहरा, नया खतरा?
ईरान में जो हो रहा है, वो सिर्फ लीडर बदलने की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की शुरुआत है जहां नीति, सेना और सत्ता एक ही दिशा में जा रहे हैं। और दुनिया के लिए इसका मतलब साफ है मिडिल ईस्ट में शांति अब और दूर जा सकती है।
इटली में गुरुद्वारे के बाहर… अपने ही ने अपनों को मार डाला!
